तमिलनाडु मॉडल:  दलित युवकों की ऑनर किलिंग सबसे बड़ा धब्बा

 तमिलनाडु सरकार ने दलित युवकों एक बाद एक हो रही ऑनर किलिंग को रोकने के लिए विशेष कानून बनाने का निर्णय लिया है। आखिर ऐसा कानून बनाने की तमिलनाडु में क्यों मांग हो रही थी? सामाजिक न्याय और कल्याणकारी राज्य का अब तक सबसे बेहतरीन मॉडल तमिलनाडु का बहुसंख्यक गैर-दलित समाज ब्राह्मण धर्म ( हिंदू धर्म) के सबसे मुख्य और बड़े संहिताकार मनु के सबसे सख्त आदेश आज भी पालन करता है कि किसी सूरत में ‘निम्न वर्ण’ का पुरूष अपने ‘उच्च वर्ण’ की स्त्री से शादी न करे। ऐसा करने पर मनु सख्त दंड का प्रावधान करता है।

तमिलनाडु के गैर-दलित ( बहुसंख्यक ब्राह्मण धर्म के अनुसार शूद्र) दलितों के मामले में इस आदेश का सख्ती से पालन करते हैं। यदि कोई दलित गैर-दलित मनु के इस आदेश का उल्लंघन करके किसी गैर-दलित लड़की से शादी कर लेता है, तो कई सारे मामलों में तमिलनाडु उसकी हत्या निश्चित है। 

गैर-दलित से लड़की से शादी करके दलित पुरूष भारतीय समाज में घोषित सबसे बड़ा अपराध करता है, क्योंकि वह तो चार वर्णों में भी शामिल नहीं है, वह उससे भी बाहर है, दख्खिन टोले का अन्यत्यज है। वह तो वर्ण-जातिवादी समाज में घोषित सबसे बड़े घृणा के पात्र ‘अछूत’ समाज से आता है। जिसको छूना तक घृणित माना जाता हो, वह वह सछूत की लड़की से प्रेम करे, शादी करे, बिस्तर शेयर करे, सछूत का दामाद बने, जीजा बने, फूफा बने, उसकी लड़की से  सेक्स करे,बच्चे पैदा करे यह तो भारतीय समाज का गैर-दलित बर्दाश्त करने के कौन कहे, सोच कर भी भीतर से हिल जाता है।

यदि कोई दलित ऐसे करने की जुर्रत करता है, तो उसकी शंबूक की तरह हत्या करीब-करीब निश्चित है, यह स्थिति तमिलनाडु में भी बरकरार है। 2016 के बाद एक नहीं, दो नहीं, ऐसे 18 दलित युवकों को गैर-दलितों ने सिर्फ इस लिए मार डाला गया, क्योंकि उन्होंने उनकी बेटी-बहन-भतीजी से प्रेम करने या शादी करने का जुर्रत की थी। ये वे मामले  हैं, राज्यव्यापी-राष्ट्रव्यापी मुद्दे बने। जिन मामलों की चर्चा ही नहीं हुई या जो मामले सामने ही नहीं आए उनकी बात ही छोड़ दीजिए।

सबसे हालिया दिल दहला देने वाला वाकया 

पिछले जुलाई ( 2025) को एक दलित साफ्टवेयर इंजीनियर की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। इस होनहार युवा का नाम कविन सेल्वा गनेश था। उसकी हत्या उस लड़की के भाई 21 सरजिथ ने की, जिससे दलित युवा प्रेम करता था और शादी का ख्वाब पाला था। लड़की का नाम सुबासिनी है। लड़की एक अस्पताल में कंस्लटेंसी का काम करती है।  लड़की तमिलनाडु के अति पिछड़े वर्ग की थी। 

हत्यारे लड़के और लड़की के माता-पिता दोनों पुलिस ऑफिसर हैं। लड़का चेन्नई में टाटा कलटेंसी सर्विस में काम करता था। लड़का और लड़की दोनों स्कूल के दिनों से एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन लड़की के परिवार वाले दलित लड़के से अपनी घर की लड़की की शादी करने को तैयार नहीं थे। दलित लड़के परिवार को कई बार धमकियां भी दी गईं। 

केविन की हत्या तब की गई, जब अपनी प्रेमिका ( सुबासिनी) के बाबा के खराब होते स्वास्थ्य का हाल-चाल लेने जा रहा था। सुबासिनी ने उसे कहा था कि कि उसके माता-पिता उससे मिलना चाहते हैं। जब केविन अपने दोपहिया वाहन पर लड़की के माता-पिता से मिलने जा रहा था, अचानक लड़की का भाई सुरजिथ उसके वाहन के सामने आकर खड़ा हो गया और चिल्लाने लगा कि मेरी जाति की लड़की से प्रेम करने और शादी का ख्वाब देखने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई। 

सरजिथ ने केविन को स्कूटर से खींच लिया, नीचे पटक दिया। प्रत्यक्षर्शियों के अनुसार केविन कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन वह उसकी पकड़ से छूट नहीं पाया। सुरजिथ ने उसके निर्मम तरीके से मार डाला। यह हत्या दिन-दहाड़े सड़क पर हुई। 

2013 में दलित युवक ईश्वरन, 2016 में शंकर और 2025 में रामचंद्रन को गैर-दलित से प्यार करने या शादी करने के बाद इससे भी निर्मम तरीके से मार डाला गया। इन दिल-दहला देने वाली वारदातों ने तमिलनाडु और विशेषकर तमिलनाडु के दलित समाज और न्याय की पक्षधर संगठनों-व्यक्तियों को हिला कर रख दिया। तमिलनाडु मॉडल के भीतर मौजूद दलितों के प्रति घृणा और नफरत इंतहा को भी उजागर किया, जिसे खत्म कर पाने तमिलनाडु मॉडल भी अभी तक असफल है।

तमिलनाडु के दलितों, उनके संगठनों, पार्टियों और वामपंथी पार्टियों ने तमिलनाडु की वर्तमान डीएमके सरकार के मुख्यमंत्री स्टालिन पर इस बात के दबाव बनाया कि इस तरह की हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए अन्य उपायों के साथ सख्त नया कानून बनाया जाए। शुरुआती हिचक के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने ऐसा विशेष कानून बनाने की पहल शुरू की।

मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने पहले तर्क दिया था कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए अलग कानून की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा कानून ही पर्याप्त हैं। हालांकि, पिछले सप्ताह राज्य विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने घोषणा की कि सेवानिवृत्त मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति के. एन. बाशा की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया जाएगा। कई विशेषज्ञों वाला यह आयोग विचार-विमर्श करेगा और सरकार को कानून बनाने के संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। 

सिर्फ डीएमके पार्टी के भीतर ही ऐसा कानून बनाने के संदर्भ में हिचक नही है, बल्कि एडीएमके, भाजपा, कांग्रेस और अन्य के भीतर भी इस तरह के कानून को लेकर हिचक और डर है, क्योंकि तमिलनाडु के बहुसंख्यक वोटर ( करीब 79 प्रतिशत) उन गैर-दलित समुदायों के हैं, जो दलितों से नफरत करते हैं, और इस तरह की हिंसक घटनाओं को अंजाम देते हैं। तमिलनाडु में दलित ( एससी) करीब 20 प्रतिशत हैं, आदिवासी ( एसटी) 1.10 प्रतिशत हैं। मुसलमानों और ईसाईयों में ब्राह्मणवादी जातिवाद की वहां पूरे देश की तरह ही घुसपैठ है।  

तमिलनाडु में व्यापक असर रखने वाली वामपंथी पार्टी सीपीएम ने ऐसा कानून बनाने के लिए पूरा जोर लगाया। तमिलनाडु में सीपीआई(एम) के सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि 2016 से उनकी पार्टी ने ऐसे मामलों में न्याय के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने कहा, “ऐसे ही बराबर संख्या में मामले रिपोर्ट नहीं हुए हो सकते हैं या दबा दिए गए होंगे।” शनमुगम ने सीपीआई और वीसीके के नेताओं के साथ मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन से मुलाकात कर एक कानून लाने की मांग की। सीपीआई(एम) ने जातिवाद के खिलाफ अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए “तमिलनाडु अछूत प्रथा उन्मूलन मोर्चा” भी शुरू किया है।  

सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में हिंदुओं का एक हिस्सा प्रेम विवाह को मजबूरी में स्वीकार करने को तैयार हुआ है; लेकिन शर्त यह है कि लड़का अपनी जाति का होना चाहिए। अन्तर्निहित शर्त यह भी है कि आर्थिक हैसियत (यानी वर्ग) कमोवेश बराबर हो। वर्ग की शर्त तो वे छोड़ सकते हैं, पर जाति की शर्त छोड़ने को वे तैयार नहीं होते। कुछ लोग जाति की भी शर्त छोड़ने को तैयार हैं बशर्ते लड़का, लड़की वालों से ‘ऊंची जाति’ का हो। इसे मनु ने अनुलोम विवाह कहा है और इसे स्वीकृति प्रदान की है। इस संदर्भ में मनु का कहना है कि-

शूद्रैव भार्या शूद्रस्य सा च स्वा च विश: स्मृते.

ते च स्वा चैव राज्ञश्च ताश्चस्वा चाग्रजन्मन: (3/13)

(यानी शूद्र केवल शूद्र महिला के साथ ही शादी कर सकता है। वैश्य, वैश्य व शूद्र दोनों वर्ण की महिला के साथ शादी करने का अधिकारी है। वहीं क्षत्रिय को क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र तीनों वर्णों की महिलाओं के साथ शादी का अधिकार है। जबकि ब्राह्मण को चारों वर्णों की महिला से विवाह का अधिकार है।)

यानी किसी भी कीमत पर लड़के वालों की जाति लड़की वालों से नीची नहीं होनी चाहिए। अगर लड़के की जाति नीची हुई तो ऐसा धर्म के विरुद्ध शादी को प्रतिलोम विवाह कहते हैं। इसकी इजाजत हिंदू धर्म-शास्त्र नहीं देते।

कन्यां भजन्तीमुत्कृष्टं न किंचदपि दापयेत्.

जघन्ये सेवामानां तुंसयतो वावसयेदगृहे. (8/365)

(इसके मुताबिक, उत्तम जाति के पुरुष के साथ संभोग करने वाली कन्या किसी प्रकार के दंड की भागी नहीं है। जबकि नीच जाति के पुरुष के साथ संभोग करने वाली कन्या को कठोर दंड दिया जाना चाहिए।)

लोहिया ने भारतीय आदमी के दिमाग को असली सच को सबसे अच्छे तरीके से चिन्हित किया था, जब उन्होंने कहा था कि भारतीय समाज के आदमी का दिमाग जाति और योनि के कटघरे में कैद है। ऐसा नहीं है कि तमिलनाडु ने वर्ण-जाति आधारित घृणा को तोड़ने के दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, सबसे अधिक ऐसे कदम तमिलनाडु में ही उठाए गए।

द्रविड़ आंदोलन के मार्गदर्शक पेरियार फुले-आंबेडकर की तरह दो टूक यह कहते थे कि वर्ण-जाति आधारित श्रेणीक्रम और वर्ण-जाति का विनाश तभी किया जा सकता है, जब प्रेम-शादी के मामलें में वर्ण-जाति आधारित सारे वर्ण-जातिवादी बैरियर तोड़ दिए जाएं। प्रेम-शादी के मामलें यदि वर्ण-जाति का बैरियर बरकरार रहता है तो वर्ण-जाति व्यवस्था को न तोड़ा जा सकता है और नहीं वर्ण-जाति आधारित भेदभाव, उत्पीड़न, दमन और हिंसा को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

फुले के सत्यशोधक विवाह पद्धति की तरह ही पेरियार ने आत्मसम्मान विवाह पद्धति की शुरुआत की थी। इस विवाह पद्धति में वर-वधू के बीच सहमति ही विवाह का मुख्य आधार है, जहां वर्ण-जाति का कोई बैरियर नहीं है। आंबेडकर का हिंदू कोड़ बिल इस दिशा में देशव्यापी स्तर उठाया गया , एक बड़ा कदम था। द्रविड़ आंदोलन की पार्टी डीएमके की जब अन्नदुरई के नेतृत्व में सरकार बनी तो अंतर्जातीय विवाह के लिए विशेष कानून बनाया गया। तमिलनाडु सरकार ने आत्मसम्मान विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान कर रही है, उसे बढ़ावा दिया जाता है। इस तरह के कई सारे कानून बनाए गए।

तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने स्कूलों में दलितों के खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव रोकने एवं खत्म करने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश के.चंदू की अध्यता में 2024 में एक कमेटी बनायी। न्यायमूर्ति चंद्रू की अध्यक्षता में इस एकसदस्यीय समिति का गठन अगस्त 2023 में तिरुनेलवेली जिले के नांगुनेरी में हुई एक घटना के मद्देनजर किया गया था। इसमें अनुसूचित जाति के दो स्कूली बच्चों पर  मध्यवर्ती जाति (ओबीसी) के छात्रों के एक समूह ने उनके घर में घुस कर दरांती द्वारा बेरहमी से हमला किया गया था।

वहां की शिक्षा-प्रणाली में व्याप्त जातीय भेदभाव से निपटने के लिए चंद्रू समिति की कुछ अन्य सिफारिशें इस प्रकार हैः

  • सरकारी स्कूलों के नामों में ‘कल्लर रिक्लेमेशन’ या ‘आदि द्रविड़ वेलफेयर’ जैसे किसी जाति विशेष के सूचक शब्दों को भी हटा दिया जाए। मौजूदा निजी स्कूलों के मामले में स्कूल शिक्षा विभाग को इन स्कूलों से जातिगत पदनाम छोड़ने का अनुरोध करना चाहिए। “अगर वे इसका पालन करने में विफल रहते हैं, तो व्यापक जनहित में विधायी बदलावों सहित उचित कानूनी कदमों पर विचार किया जाना चाहिए।”
  • राज्य सरकार को मौजूदा तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1975 में संशोधन करने के लिए कदम उठाने चाहिए तथा इसमें यह प्रावधान जोड़ना चाहिए कि शैक्षणिक संस्थान शुरू करने का इरादा रखने वाली सोसायटी को अपने संस्थान के नाम में कोई जातिसूचक शब्द शामिल नहीं करना चाहिए।
  • छात्रों की साइकिलों पर भी जाति का उल्लेख करने या किसी भी तरह से जाति संबंधी भावना के प्रदर्शन को रोका जाना चाहिए और इसके लिए उनके माता-पिता से भी बात की जानी चाहिए। 
  • छात्रों की उपस्थिति रजिस्टर में उनकी जाति से संबंधित कोई कॉलम या विवरण नहीं होना चाहिए।
  • “किसी भी बिंदु पर कक्षा शिक्षक छात्रों को सीधे या परोक्ष रूप से उनकी जाति का उल्लेख करके नहीं बुला सकते हैं, न ही छात्र की जाति या जाति से जुड़े तथाकथित चरित्र के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी कर सकते हैं।”
  • रसोइयों की जातिगत पहचान को छिपाने के उद्देश्य से  विद्यालयों की बजाय हर ब्लॉक/पंचायत संघ में एक केंद्रीकृत रसोई की व्यवस्था की जाए।
  • सरकार सामाजिक न्याय निगरानी समिति गठित करे जिसमें शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों, जो सामाजिक मुद्दों से संबंधित पाठ्यक्रम की जांच करें और संशोधनों का सुझाव दें, तथा सामाजिक न्याय, समानता और गैर-भेदभाव पर आधारित विषयों को शामिल करने पर जोर दें।
  • समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए बी.एड. और डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन के पाठ्यक्रमों को संशोधित किया जाए।
  • सभी स्कूलों और कॉलेजों में प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था पूरी तरह से उनके नामों के वर्णमाला क्रम पर आधारित हो।
  • विद्यालयों में छात्रों द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग पहले से प्रतिबंध है, लेकिन उस पर अमल में सख्ती नहीं बरती जा रही है। “मोबाइल फोन पर प्रतिबंध का यह आदेश न केवल राज्य बोर्ड के तहत आने वाले स्कूलों के छात्रों पर लागू होना चाहिए, बल्कि सीबीएसई और आईसीएसई जैसे अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों के छात्रों पर भी लागू होना चाहिए, ताकि सभी शैक्षणिक संस्थानों में एक जैसी व्यवस्था लागू हो।”
  • तमिलनाडु सरकार स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक सभी छात्रों के लिए एक अलग कानून बनाए, ताकि सामाजिक समावेश की नीति लागू की जा सके और जातिगत भेदभाव को समाप्त किया जा सके। “इस कानून में छात्रों, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के साथ-साथ ऐसे संस्थानों के प्रबंधन पर कर्तव्य और जिम्मेदारियां लगाई जानी चाहिए तथा इन निर्देशों का पालन न करने पर पर्यवेक्षण, नियंत्रण और दंड के लिए तंत्र निर्धारित किया जाना चाहिए।”
  • “पाठ्यक्रम और मानकों से संबंधित दिशा-निर्देशों को निर्धारित करना और बोर्ड परीक्षा आयोजित करना स्कूल शिक्षा निदेशालय और राज्य सरकार द्वारा प्रबंधित किया जाए।”
  • “सरकार को स्थानीय निकायों को वास्तविक स्वायत्त शक्तियाँ प्रदान करने के लिए नया कानून बनाना चाहिए, मौजूदा तमिलनाडु पंचायत अधिनियम 1994 में संशोधन करके शिक्षा को अधिक जनोन्मुखी बनाना चाहिए।”
  • स्कूल शिक्षा प्रणाली में स्थानीय निकायों को दी गई वर्तमान सीमित भूमिका को प्राथमिक शिक्षा पर पूर्ण नियंत्रण तक विस्तारित किया जाए। ब्लॉक-स्तरीय प्रशासन (पंचायत संघों) का स्कूलों पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए, जिसमें कर्मचारियों की नियुक्ति, तैनाती और निष्कासन शामिल है।

 तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने इस सिफारशों को लागू करने का निर्णय लिया। इस सब के बाद तमिलनाडु में गैर-दलितों के दिल-दिमाग में दलितों के प्रति जो घृणा और हिंसक भाव मौजूद हैं, उसके सबसे सशक्त अभिव्यक्ति दलित युवकों की ऑनर किलिंग में सामने आती है। तमिलनाडु के सामाजिक न्याय और लोक कल्याणकारी राज्य के मॉडल पर यह सबसे बड़ा धब्बा है। यह इस बात का पुख्ता साक्ष्य है कि आज भी भारत दलितों के लिए कैसे टार्चर चैम्बर बना हुआ है, जहां वह गरिमा, सम्मान, बराबरी और भाईचारे के साथ जीने के बारे में सोच नहीं सकते हैं।

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